फिटनेस-मेनिया उस वर्ग-विशेष के लोगोïं के जीवन पर कहर बरपा कर रहा है, जो ऐसा मानते हैïं कि उत्तम स्वास्थ्य और बेहतर फिगर का शॉर्टकट है ट्रीडमिल अथवा स्टेपर पर घण्टोïं समय बिताना, कठोर डाइटिंग करना या दर्जनोंï बार एब्डॉमिनल क्रन्चेज का सहारा लेना। आहार और व्यायाम से जुड़ी कुछ प्रमुख गलत धारणाओंï, भ्रमोंï का स्पष्टïीकरण, स्वस्थ विधि से वजन घटाने तथा खानपान मेंï सूझ -बूझ से परिवर्तन करने वालोïं के लिए निश्चय ही लाभकारी होगा।
भ्रम: फालतू वजन मेंï से महज चंद किग्रा भार कम करने से ही मेरी लुक मेï निखार आ जाएगा।
सत्य: वजन घटाने मेïं पहली चीज ध्यान देने योग्य है कि शरीर की वसा घटाने को लक्ष्य बनाया जाए, न कि महज भार कम करने को। शरीर मेंï दो प्रकार के ऊतक होते हैï, माँसपेशी-ऊतक या कैलोरियोïं का उपयोग केïंद्र तथा वसा-ऊतक या कैलोरी-बैïक । वसा घटाने की तुलना मेंï वजन घटाना कहींï आसान काम है और इसमेïं स्वस्थ माँसपेशियोंï के अलावा जल के क्षय होने का भी संकेत मिलता है, नतीजतन व्यक्ति शीघ्रतापूर्वक छरहरा दिखने लगता है, साथ ही साथ, कम हुआ वजन उतनी ही तेजी से वापस बढ़ जाता है। कठोर डाइटिंग एवं व्यायाम द्वारा ही ऐसा संभव है। यदि माँसपेशी-ऊतक का क्षय होता है तो बेसल मेटाबो-लिक रेट घट जाती है। कैलोरी खपाने वाले ऊतक एक बार क्षय हो जाएँ तो वसा-संचय क्षमता स्वत: बढ़ जाती है क्योïंकि स्वयं को चलायमान रखने के लिए शरीर को एक निश्चित मात्रा मेïं ही कैलोरियोï की आवश्यकता होती है।
भ्रम: ट्रीडमिल, स्टेपर या साइकिल पर एक घण्टे से अधिक वर्क-आउट से वसा क्षय तीव्र गति से होता है।
सत्य: इन मशीनोïं पर एक घण्टे से अधिक वर्कआउट करने से शरीर को लाभ की बजाय हानि ही हो सकती है। शरीर ग्लाइकोजेन को बतौर ऊर्जा तत्परता से इस्तेमाल करता है और उसकी गैर-मौजूदगी मेंï माँसपेशी-ऊतक को चुनता है। बतौर ऊर्जा-स्रोत, वसा ही शरीर की अंतिम पसंद होती है। अत: माँसपेशियोïं को कम से कम करने तथा व्यायाम के लाभ प्राप्त करने के लिए एक बार मेंï 45 मिनट से अधिक व्यायाम करने की कोशिश न करेï।
भ्रम: क्रन्चेज की मदद से पेट पर चर्बी की परतेंï कम हो जाती है।
सत्य: धड़ पर चढ़ी चर्बी की बरतेï सिर्फ उदर-क्रन्चेज की मदद से ही समाप्त नहीïं होतीï, न ही किसी व्यायाम विशेष से बेहद असाधारण परिणाम मिल पाते हैंï। समूचे शरीर को चुस्त-दुरुस्त बनाने तथा शरीर के किसी खास हिस्से मेंï बेहतर परिणाम पाने के लक्ष्य निर्धारित होने चाहिए।
भ्रम: भोजन मेंï कमी के बावजूद वजन मेंï नहीïं कमी।
सत्य: कम या बेहद कम खाने से शुरू-शुरू मेंï भले कुछ वजन घट जाए, जो वस्तुत: माँसपेशी-क्षय या जल-क्षय हो सकता है लेकिन चयापचय-दर मेंï कमी की वजह से वजन जस का तस रह जाता है। इस स्थिति से बचने के लिए कैलोरियोंï की दैनिक आवश्यकता मेंï से सिर्फ 300-500 कैलोरियाँ कम करना ही श्रेयस्कर रहेगा तथा कैलोरियाँ का कुछ भाग व्यायाम के जरिये खर्च किया जा सकता है। इस तरह बेसल मेटाबोलिक रेट (बी. एम. आर.) ठीकठाक रहता है तथा बगैर भूखे रहे वजन घटाया जा सकता है।
– शिप्रा माथुर
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